श्रीमद्भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता का परिचय – Introduction of Bhagavad Gita in Hindi

श्रीमद्भगवद्गीता – दोस्तों, आज से हम आपके बढ़ते सहयोग और प्यार को देखते हुए श्रीमद्भगवद्गीता को आपके सामने आसान शब्दों में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहें हैं। 

वैसे तो बहुत सी भगवद्गीता आपने पढ़ी होंगी और बहुत से लोग इसके ज्ञान पर कार्य करते हैं, इसलिए हम इसको आसान शब्दों में जानेंगे ताकि आपको अच्छे से समझ आ सके। 

भगवद्गीता में सबसे खास श्रीकृष्ण हैं और बाकी सब तो सिर्फ साधन ही हैं और आज के जमाने में हम इसको समझ पाएं और इसको हम जीवन में उतार पाएं यही हमारा प्रयास है। 

भगवद्गीता का ज्ञान स्वयं श्रीकृष्ण अर्थात भगवान नारायण ने अर्जुन को महाभारत के युद्ध से शुरू होने से पहले कुरुक्षेत्र में दिया था। 

भगवद्गीता ही ऐसा एक धर्म ग्रन्थ है जिसके बारे में बहुत कुछ लिखा गया है और समय-समय पर इसकी आव्यशकता बढ़ती ही जा रही है और भगवद्गीता विश्व के हर प्रश्न का उत्तर है, जीवन से जुड़ा हर एक चीज़ का उत्तर श्री कृष्ण ने भगवद्गीता में दिया है। 

हमारे मन में चल रही हर चिंता, परेशानी, दुविधा और धर्म संकट का समाधान सिर्फ गीता है। 

भगवद्गीता में 18 अध्याय हैं और हर अध्याय में वेदों और उपनिषदों का सार है और इसके हर अध्याय के हर श्लोक में आप खुद को अर्जुन समझ सकते हैं, जिसे श्रीकृष्ण ज्ञान दे रहे हैं। 

पांडवों और कौरवों के बीच महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में शुरू होने वाला था, दोनों पक्षों की सेनाएं आमने-सामने खड़ी थी। 

पांडवों की सेना से अर्जुन ने जब कौरवों की सेना की तरफ देखा, तो उनके मन में विचार आया की वे कैसे अपने सगे-संबंधियों और परिवारजनों पर प्रहार कर सकते हैं, इसलिए तब अर्जुन ने श्रीकृष्ण जो उनके रथ के सारथी का कार्य कर रहे थे, उनसे अपने भाव व्यक्त किए और कहा की, मैं कैसे परिवारजनों से युद्ध कर सकता हूँ।  

अर्जुन अपने बल भाव से सीधा कमज़ोर भाव में आ गए थे, उनके मन में बहुत सारी दुविधाएँ उत्पन्न होनें लग गई थी, उनके मन में यह विचार चल रहे थे की वे युद्ध करें की वैराग्य ले लें। 

ऐसे में तब श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को इस दुविधा से बाहर निकाला गया और श्रीकृष्ण ने गुरु धर्म निभाते हुए तर्क, बुद्धि, ज्ञान और कर्म की चर्चा करते हुए और विश्व के स्वभाव की जानकारी के साथ और अंत में सर्वोपरि परम सत्तावान ब्रह्म के विराट स्वरूप के साक्षात दर्शन देकर अर्जुन के मन में चल रही सारी दुविधाओं का अंत किया था। 

इसी श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद को और श्रीकृष्ण के इन्हीं उपदेशों को हम श्रीमद्भगवद्गीता ग्रंथ के रूप में पढ़ते हैं और श्रीमद्भगवद्गीता का मतलब है भगवान का गाया हुआ ज्ञान। 

श्री कृष्ण को हम अर्जुन के सारथी मात्र नहीं बल्कि हमारे जीवन के सारथी के रूप में भी देख सकते है और उनके दिखाए गए मार्ग पर चलते हुए हम हमारे जीवन के सभी चिंताओं, दुखों का निवारण प्राप्त कर सकते हैं। 

यह महाभारत के भीष्म पर्व का अंग है और इसमें 18 अध्याय और कुल 700 श्लोक हैं। 

भगवद्गीता विचारों की और ज्ञान की सतत प्रवाहमति नदी जैसी है जो युगों-युगों से हमारी संस्कृति को सिंचित करती हुई आ रही है, इसका ज्ञान सिंधु इतना गहरा और विराट है की जितना हम इसमें गहरा जाते जाएंगे, हमें उतने ही ज्ञान रुपी मोती इसमें प्राप्त होंगे। 

तो चलिए दोस्तों, अब हम भगवद्गीता के ज्ञान के सफर पर चलते है और इसके 18 अध्यायों के ज्ञान के सफर पर चलते हैं, हम इसके बाद हर एक आर्टिकल में भगवद्गीता के एक अध्याय के बारे में समझेंगे। 

श्रीमद्भगवद्गीता का परिचय – Introduction of Bhagavad Gita in Hindi

हम आशा करते हैं कि हमारे द्वारा दी गई श्रीमद्भगवद्गीता का परिचय – Introduction of Bhagavad Gita in Hindi के बारे में  जानकारी आपके लिए बहुत उपयोगी होगी और आप इससे बहुत लाभ उठाएंगे। हम आपके बेहतर भविष्य की कामना करते हैं और आपका हर सपना सच हो।

धन्यवाद।

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