Indian Council Act 1861 in Hindi

Indian Council Act 1861 in Hindi – भारत परिषद अधिनियम 1861

Indian Council Act 1861 in Hindi – दोस्तों, आज हम भारत परिषद अधिनियम 1861 के बारे में जानेंगे, ब्रिटिश सरकार ने इस एक्ट के द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में जो शासन करने के सरकारी नियम थे उनमे बहुत बदलाव किये थे, ताकि भारत का शासन सुचारु रूप से चल सके। 

भारत परिषद अधिनियम 1861 की पृष्टभूमि ( Background of indian council act 1861 )

इससे पहले जितने एक्ट ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत को लेकर लागू किये गए थे उनका प्रभाव भारत परिषद अधिनियम 1861 में भी पड़ा था। 

1600 से लेकर भारत में पहले से ही ब्रिटिश ईस्ट इंडिया शासन कर रही थी, बाद में ब्रिटिश सरकार द्वारा 1773 रेगुलेटिंग एक्ट लागू किया गया और ईस्ट इंडिया कंपनी पर अपना नियंत्रण करने की प्रक्रिया का आरंभ कर दिया था। 

इसके बाद भी कई चार्टर एक्ट ( 1813, 1833, 1853 ) ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किये गए और सरकार ने इन एक्ट के द्वारा भी ईस्ट इंडिया कंपनी के ऊपर अपना नियंत्रण और ज्यादा मजबूत किया था। 

बाद में जब 1857 की क्रांति हुई तब ब्रिटिश सरकार को लगा की अब ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा भारत में शासन ढंग से नहीं संभाला जा रहा है और तब भारत सरकार अधिनियम 1858 ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किया गया था और ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत में शासन ख़त्म करते हुए, सारी शासन व्यवस्था सीधे अपने हाथों में ले ली थी। 

जब ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत का सारा शासन अपने हाथों में ले लिया गया, तब उन्हें यह लगा की ईस्ट इंडिया कंपनी की जो शासन प्रणाली थी जो भारत में चल रही थी उसमे बदलाव की जरुरत है, ताकि शासन व्यवस्था बेहतर रूप से चल सके। 

इसी बिंदु को देखते हुए ब्रिटिश सरकार द्वारा इसको लेकर तीन अधिनियम पास किये गए थे, जो इस प्रकार थे:

1. भारत परिषद अधिनियम 1861

2. भारत परिषद अधिनियम 1892 

3. भारत परिषद अधिनियम 1909 

भारत सरकार का नियंत्रण ( Control of Government of India )

भारत सरकार अधिनियम 1858 में जहां ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट इंडिया कंपनी को चलाने वाली इकाई कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स ( Court of Directors ) और बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल ( Board of Control ) को ख़त्म करके एक सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट ( Secretary of State ) की नियुक्ति कर दी थी। 

तब से इसी सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट के ऊपर भारत के शासन की पूर्ण जिम्मेदारी होती थी। 

इसके साथ सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट ब्रिटिश सरकार में एक कैबिनेट मंत्री भी होता था और यह ब्रिटेन में रहकर यह भारत की शासन व्यवस्था संभालता था और इसकी सहायता के लिए एक सलाहकार समिति भी थी जिसमे 15 सदस्य होते थे। 

भारत सरकार अधिनियम 1858 में क्यूंकि सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट ब्रिटेन में रहकर भारत की शासन व्यवस्था संभालता था, इसलिए उसके प्रतिनिधित्व के रूप में भारत में एक वाइसराय की नियुक्ति भी की गयी थी और उस समय जो भारत में गवर्नर जनरल ऑफ़ इंडिया था उसी को वाइसराय बना दिया गया था। 

भारत परिषद अधिनियम 1861 में ब्रिटिश सरकार द्वारा इस बिंदु को लेकर कोई बदलाव नहीं किये गए थे। 

प्रशासन ( Administration )

चार्टर एक्ट 1853 में जहां गवर्नर जनरल ऑफ़ इंडिया ( Governer general of India ) के पास पूर्ण शासन व्यवस्था की जिम्मेदारी थी और उसकी सहायता के लिए एक कार्यकारी परिषद ( Executive Council ) थी जिसमे 4 सदस्य हुआ करते थे। 

बाद में भारत सरकार अधिनियम 1858 में इस गवर्नर जनरल ऑफ़ इंडिया के पद को ख़त्म करके वाइसराय बना दिया गया था। 

भारत परिषद अधिनियम 1861 में इस बिंदु को लेकर बहुत सारे बदलाव हुए थे जैसे की:

1.भारत परिषद अधिनियम 1861 से पहले तक जो कार्यकारी परिषद ( Executive Council ) हुआ करती थी, वह एक सलाहकार समिति के जैसे काम करती थी। 

परंतु अब भारत परिषद अधिनियम 1861 में कार्यकारी परिषद के हर सदस्य को एक-एक पोर्टफोलियो या विभाग या कार्य सौंप दिए गए थे। 
2.कार्यकारी परिषद के सदस्यों की संख्या को भी बढ़ा दिया गया था, पहले इस संख्या को 4 से 5 कर दी गई थी और पाँचो सदस्यों को कानून, सैन्य, राजस्व, वित्त और ग्रह विभाग दे दिए गए थे। 

बाद में एक सदस्य और जोड़ा गया जिसे लोक निर्माण विभाग दिया गया था। 

इस प्रकार कार्यकारी परिषद में कुल 6 सदस्यों की नियुक्ति कर दी गयी थी। 
3.भारत परिषद अधिनियम 1861 के द्वारा पहली बार ब्रिटिश सरकार ने अध्यादेशों ( Ordinance ) की शुरुवात की थी और वाइसराय को यह अधिकार दिए थे की वह आपातकालीन स्थितियों में अध्यादेश को पास कर सकता है। 

इस अध्यादेश पास करने की प्रक्रिया में वाइसराय को अपनी कार्यकारी परिषद की आव्यशकता नहीं थी, वह खुद ही अध्यादेश को आपात स्थिति में पास कर सकता था। 

इन अध्यादेशों की वैधता 6 माह तक की होती थी और यह एक प्रकार से अस्थायी रूप में लागू किये जाते थे। 
Indian Council Act 1861 in Hindi – भारत परिषद अधिनियम 1861

केंद्रीय विधायिका ( Central Legislature )

चार्टर एक्ट 1853 में जहां गवर्नर जनरल ऑफ़ इंडिया ( Governer general of India ), उसकी कार्यकारी परिषद के चार सदस्य और 1 कमांडर इन चीफ ( Commander-in-cheif ) और इनके साथ 6 विधान पार्षद ( Legislative Councillors ), ये 12 सदस्य मिलकर विधायी कार्यों ( Legislative Functions ) को करते थे। 

ये सारे एक छोटी संसद के रूप में कार्य करते थे। 

बाद में भारत सरकार अधिनियम 1858 में हमने आपको पहले भी बताया इस गवर्नर जनरल ऑफ़ इंडिया को वाइसराय बना दिया गया था। 

भारत परिषद अधिनियम 1861 में इस बिंदु को लेकर बहुत सारे बदलाव हुए थे जैसे की:

1.भारत परिषद अधिनियम 1861 में जो 6 विधान पार्षद ( Legislative Councillors ) थे, उनके पद को ख़त्म कर दिया गया था और उनकी जगह कुछ अतिरिक्त सदस्यों ( Additional Members ) की नियुक्ति की गयी थी। 
2.इन अतिरिक्त सदस्यों को वाइसराय के द्वारा मनोनीत करा जाता था और इनमे कुछ स्थायी सदस्य ( Official Members ) होते थे और कुछ अस्थायी सदस्य ( Non-official ) होते थे। 

इसमें स्थायी सदस्यों की संख्या हमेशा ज्यादा होती थी। 
3.इन अतिरिक्त सदस्यों का कार्यकाल 2 साल तक का होता था, और इन अतिरिक्त सदस्यों की संख्या को कम से कम 6 और ज्यादा से ज्यादा 12 रखा जाता था। 
4.कार्यकारी परिषद ( Executive Council ) के जो मुख्य 6 सदस्य होते थे उनमें भारतीयों को नियुक्त होने की अनुमति नहीं थी परंतु भारतीय अतिरिक्त सदस्यों में वाइसराय के द्वारा नियुक्त किये जा सकते थे। 

वाइसराय के द्वारा उस समय तीन भारतीयों को भी अस्थायी सदस्यों में मनोनीत किया गया था, वे भारतीय थे:
(i) सर दिनकर राव 
(ii) पटियाला के महाराजा 
(iii) बनारस के राजा 
5.अब भारत परिषद अधिनियम 1861 के बाद से वाइसराय, उसकी कार्यकारी परिषद के 6 सदस्य और ये अतिरिक्त सदस्य मिलकर कानून बनाएंगे या विधायी कार्यों ( Legislative Functions ) को करेंगे। 

ये सब भी मिलकर एक छोटी संसद का स्वरुप ही बनाते थे। 
6.इस केंद्रीय विधायिका ( Central Legislature ) में किसी भी तरह का वित्तीय संबंधीय विचार – विमर्श नहीं होता था जैसे की अतिरिक्त सदस्यों को कार्यकारी परिषद ( Executive Council ) के मुख्य 6 सदस्यों से उनके विभागों के वित्तीय मुद्दों से संबंधित किसी भी प्रश्न को पूछने का अधिकार नहीं था। 
Indian Council Act 1861 in Hindi – भारत परिषद अधिनियम 1861

प्रांतीय विधायिका ( provincial legislature )

चार्टर एक्ट 1833 में जहां कानून बनाने की प्रक्रिया का केन्द्रीयकरण कर दिया गया था, यानी बॉम्बे और मद्रास प्रेसीडेंसी को ख़त्म करके गवर्नर जनरल ऑफ़ इंडिया ही कानून बना सकता था। 

भारत परिषद अधिनियम 1861 में इस प्रांतीय विधायिका यानी बॉम्बे और मद्रास प्रेसीडेंसी को फिर से वहां के लिए कानून बनाने के अधिकार दे दिए गए थे। 

इसके साथ ही साथ कई अन्य क्षेत्रों में भी प्रांतीय विधायिका बनायीं गयी थी जैसे की:

(i) उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत ( North West Frontial Province )

(ii) पंजाब

(iii) बंगाल 

इन प्रांतीय विधायिकाओं में भी अतिरिक्त सदस्य और उसमे स्थायी और अस्थायी सदस्यों जैसी प्रणाली को रखा गया था, परन्तु सदस्यों की संख्या हर जगह अलग-अलग होती थी। 

भारत परिषद अधिनियम 1861 से जुड़े कुछ अन्य बिंदु

1. वाइसराय के पास कुछ महत्वपूर्ण अधिकार थे जैसे की उसकी मंज़ूरी के बिना धर्म, सार्वजनिक राजस्व, विदेश मामले, और सैन्य संबंधित बिलों को पास नहीं किया जा सकता था। 

2. सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट ( Secretary of State ) जिसका प्रतिनिधित्व भारत में वाइसराय करता था, उसके पास भी यह अधिकार था की अगर कोई बिल केंद्रीय विधायिका द्वारा पास कर दिया गया हो, तो वह उसे रद्द कर सकता था। 

Indian Council Act 1861 in Hindi – भारत परिषद अधिनियम 1861

हम आशा करते हैं कि हमारे द्वारा दी गई Indian Council Act 1861 in Hindi ( भारत परिषद अधिनियम 1861 ) के बारे में  जानकारी आपके लिए बहुत उपयोगी होगी और आप इससे बहुत लाभ उठाएंगे। हम आपके बेहतर भविष्य की कामना करते हैं और आपका हर सपना सच हो।

धन्यवाद।


यह भी पढ़े : पिट्स इंडिया एक्ट

यह भी पढ़े : Articles of Indian Constitution in Hindi

बार बार पूछे जाने वाले प्रश्न

1861 में वायसराय कौन था?

1861 में लॉर्ड कैनिंग ( Lord Canning ) वायसराय थे और ये ही सबसे पहले वाइसराय भी बने थे।

1861 का भारत परिषद अधिनियम क्या है?

जब ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत का सारा शासन अपने हाथों में ले लिया गया, तब उन्हें यह लगा की ईस्ट इंडिया कंपनी की जो शासन प्रणाली थी जो भारत में चल रही थी उसमे बदलाव की जरुरत है, ताकि शासन व्यवस्था बेहतर रूप से चल सके। 

कार्यकारी परिषद क्या है?

गवर्नर जनरल ऑफ़ इंडिया ( Governer general of India ) के पास पूर्ण शासन व्यवस्था की जिम्मेदारी थी और उसकी सहायता के लिए एक कार्यकारी परिषद ( Executive Council ) थी जिसमे 4 सदस्य हुआ करते थे। 

Leave a Comment

Your email address will not be published.