parliamentary committees in hindi

Parliamentary Committees in Hindi

parliamentary committees in hindi – दोस्तों, संसद भारत के संचालन तंत्र का एक मुख्य हिस्सा है, ये विधायिका के रूप में भी जानी जाती है, अर्थात यहाँ विधि से जुड़े कार्य और विधि का निर्माण किया जाता है, और जैसा की आपको पता होगा की इसके तीन अंग होते है, लोक सभा, राज्य सभा, और राष्ट्रपति ये तीनो अंग मिलकर संसद का कार्य करते है।

संसद में प्रभावशाली और गुणवक्तापूर्वक कार्य करने के लिए उसमे कुछ समितियां बनाई जाती है, जिसमे बहुत सारे सदस्य और अध्यक्ष होते है, अलग-अलग समितियां अलग-अलग कार्य करती है, जिससे कार्य सबमे बट जाता है, संसद अपने कार्य इन्ही संसद समितियों द्वारा संचालित करती है।

संसदीय समितियां दोनों सदनों में, किसी भी राजनीतिक दल के बिना, और मिनी संसद के रूप में कार्य करती हैं। ये समितियां एक वर्ष तक काम करती हैं और स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा सुधार जैसे जनहित के मुद्दों के लिए जिम्मेदार हैं।

उन्हें संसद के दोनों सदनों द्वारा स्थायी समितियों के रूप में नियुक्त किया जाता है, जो उन मुद्दों की जांच और रिपोर्ट करती है, समितियां वर्षों तक काम करती हैं, लेकिन अपने कार्यों और निर्णयों के लिए अपने संबंधित पक्षों के प्रति जवाबदेह होती हैं।

इन समितियों में एक सचिवालय होता है जो लोकसभा और राज्यसभा के सचिवालयों द्वारा प्रदान किया जाता है। उन्हें संसदीय समितियां कहा जाता है क्योंकि उन्हें दोनों सदनों द्वारा नियुक्त और निर्वाचित किया जाता है।

कुछ बिलों की जांच और रिपोर्ट करने के लिए और वित्त और वित्त बिलों के लिए संयुक्त समितियों का चयन किया जाता है।

Parliamentary Committees in Hindi – संसदीय समितियों का इतिहास

1. 1919 में मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार से ये व्यवस्था भारत में आयी।

2. 1921 में इस व्यवस्था को कार्यगत रूप दिया गया।

इस व्यवस्था को समय के साथ साथ एक मुख्य कार्य प्रणाली के रूप में अपना लिया गया और ये व्यवस्था संसद का एक मुख्य हिस्सा बन गयी और संविधान में भी कई समितियों का हमे वर्णन मिलता है।

Parliamentary Committees in Hindi – संसदीय समितियों के प्रकार 

काम को सुविधाजनक बनाने के लिए, संसद में दो मुख्य प्रकार की समिति होती है सबसे पहले, स्थायी समिति – वे समितियां जिनका प्रावधान है और ये नियमित रूप से अपना कार्य करती रहती है और अस्थायी समिति या तदर्थ समितियां, जो केवल अस्थायी रूप से मौजूद होती हैं और केवल एक एजेंडे पर होती हैं, जो विशेष रूप से विशिष्ट परियोजना के अनुरूप होती हैं, जो भंग होने से पहले समिति में होती हैं। ये समितियां उन मामलों को उठाती हैं जो अन्य संसदीय समितियों की क्षमता के अंतर्गत नहीं आते हैं।

स्थायी समिति

वे समितियां जिनका प्रावधान है और ये नियमित रूप से अपना कार्य करती रहती है। 

सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक, जो स्थायी समितियों में आते हैं, सलाहकार समितियों की सिफारिशों को संदर्भित करना है, जो संसद और प्रधानमंत्री को सिफारिशें देते हैं। सलाहकार समितियाँ बिल द्वारा नियुक्त की जाती हैं जो विशिष्ट बिलों की जांच और रिपोर्ट करती हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विशिष्ट मुद्दों पर कुछ विशेष समितियों को छोड़कर, किसी विशेष विधेयक पर विचार करने के लिए कोई चयन समिति नहीं है।

अस्थायी समिति / तदर्थ

वे समितियां जिनका गठन तभी किया जाता है जब कोई विशेष कार्य करना हो।

विधेयकों पर चयन और संयुक्त समिति, तदर्थ समितियां हैं और ये बहुत महत्वपूर्ण बिलों की विस्तार से जांच करने के लिए स्थापित की जाती है। वे विशिष्ट उद्देश्यों के लिए नियुक्त किए जाते हैं और जब ये उन्हें सौंपे गए कार्यों को पूरा कर लेती है और एक रिपोर्ट सौंप देती है, तो समाप्त हो जाती है।

आइये हम मुख्य समितियों पर दृष्टि डालते है:

स्थायी समितिअस्थायी समिति / तदर्थ
लोक लेखा समिति ( Public Account Committee )जाँच समिति ( Inquiry Committee )
प्राक्लन समिति ( Estimate Committee ) सलाहकार समिति                                         
लोक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertaking )
अनुसूचित जाति, जनजाति, कल्याण समिति
कार्य मंत्रणा समिति ( Business Advisory  Committee )
विशेषाधिकार समिति ( Committee on Privileges )
विभागीय समिति ( Departmental Committee )
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संसदीय समितियों के सदस्यों  को चुनने का अधिकार

संसदीय समितियों में सदस्य, संसद के सदस्यों से ही चुन कर आते है और उन समितियों को लोक सभा के अध्यक्ष और राज्य सभा के सभापति चुनते है, समितियों में सदस्य 2:1 के अनुपात में चुने जाते है यानी अगर लोक सभा से दो सदस्य चुने जाते है तो राज्य सभा से एक सदस्य चुना जाता है, लेकिन ये अनुपात उस स्थिति में लागू नहीं होता जिस समिति में केवल एक ही सदन से सदस्य चुने गए हो।

आइये अब कुछ मुख्य और विशेष समितियों को विस्तार से जाने:

लोक लेेखा समिति ( Public Account Committee ) 

इस समिति को CAG का मित्र भी कहा जा सकता है और साथ ही साथ CAG का दार्शनिक भी कहा जा सकता है, इस समिति में कुल 22 सदस्य होते है, जिसमे 15 सदस्य लोक सभा से और 7 सदस्य राज्य सभा से होते है।

कुल सदस्य = 22 ( 15 लोक सभा + 7 राज्य सभा )

इस समिति का कार्य काल एक वर्ष का होता है, इस समिति का कार्य यह होता है की सरकार के द्वारा एक वर्ष में जितना भी खर्चा किया गया होता है उसकी जांच करना और CAG द्वारा दी गयी रिपोर्ट पर विचार करना होता है, इस समिति की अध्यक्षता करने का अवसर विपक्ष को दिया जाता है ताकि इस कार्य में पारदर्शिता बनी रहे।

इसको प्राक्लन समिति की “जुड़वाँ बहन” कहकर भी सम्भोदित किया जाता है।

इसमें मंत्रिपरिषद का कोई भी सदस्य इस समिति में नहीं चुना जाता क्यूंकि वे सरकार का ही अंग होते है, जिससे की इसके कार्य की पारदर्शिता में हानि हो सकती है।

इसकी सहायता CAG करते है, और CAG को “लोक लेखा समिति का मार्गदर्शक” भी कहते है।

प्राक्लन समिति ( Estimate Committee )

इस समिति में कुल 30 सदस्य होते है, और सदस्य लोक सभा से ही चुने जाते है।

कुल सदस्य = 30  ( सारे लोक सभा से )

इसका कार्य मूल्यांकन करना और परिस्थितियों की जांच करना होता है, इसका कार्य वित्तीय कार्य से सम्भंदित होता है, मितव्ययता और प्रशाशनिक सुधार पर रिपोर्ट बनाना होता है अर्थात जैसे की सरकार जब जन-कल्याण के लिए खर्च करती है तो यह समिति सरकार के लिए रिपोर्ट बनाती है कैसे उस कार्य को बेहतर और कम खर्च में किया जा सकता है।

इसका कार्य काल एक वर्ष का होता है, इसमें पक्ष और विपक्ष दोनों के ही सदस्य चुने जा सकते है। 

लोक उपक्रम समिति ( Committee on Public Undertaking )

इस समिति में भी 22 सदस्य होते है, जिसमे 15 सदस्य लोक सभा से और 7 सदस्य राज्य सभा से होते है।

कुल सदस्य = 22 ( 15 लोक सभा + 7 राज्य सभा )

इसका कार्य सरकारी और अर्ध सरकारी कम्पनियाँ जो सार्वजनिक क्षेत्रो में कार्य करती है जैसे LCI , एयर इंडिया , FCI आदि जैसी कम्पनियों के लेखो की जांच करना होता है।

यह समिति भी CAG की रिपोर्ट की जांच करती है, लोक लेखा समिति और लोक उपक्रम समिति कुछ हद्द तक एक समान ही होती है। 

इसका कार्य काल एक वर्ष का होता है।

हमने जो आपको तीन समितियों के बारे में जानकारी दी है, वे तीनो समितियां वित्तीय कार्य से सम्भंदित कार्य करती है। 

अनुसूचित जाति, जनजाति, कल्याण समिति

इस समिति में कुल 30 सदस्य होते है, जिसमे की 20 सदस्य लोक सभा से और 10 सदस्य राज्य सभा से होते है। 

कुल सदस्य = 30 ( 20 लोक सभा + 10 राज्य सभा )

इसका कार्य अनुसूचित जाति ( Schedule Caste ), अनुसूचित जनजाति ( Schedule Tribe ) की विशेष रिपोर्ट्स की जांच करना, ये समिति ऊपर बताई गयी तीन समितियों की वित्तीय जांच से हटके सुधारवादी जांच करती है।

कार्य मंत्रणा समिति ( Business Advisory  Committee )

इस समिति में संसद के दोनों सदनों में अलग-अलग समिति बनाई जाती है, जिसमे की लोक सभा की समिति में 15 सदस्य होते है और राज्य सभा की समिति में 11 सदस्य होते है। 

लोक सभा की समिति में सदस्य – 15

राज्य सभा की समिति में सदस्य – 11

इसका कार्य यह होता है की संसद के कार्यो में सुधार करना और समय तालिका को विनयमित करना और बेहतर करने का सुझाव देना होता है। 

लोक सभा का कार्य और समय बेहतर करने का सुझाव देने का कार्य लोक सभा में बनायीं गयी कार्य मंत्रणा समिति करती है और राज्य सभा का कार्य और समय बेहतर करने का सुझाव देने का कार्य राज्य सभा में बनायीं गयी कार्य मंत्रणा समिति करती है।

ये सारी समितियाँ अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करती है। 

parliamentary committees in hindi

तो ये थी कुछ मुख्य समितियों के बारे में जानकारी, हम आशा करते हैं कि हमारे द्वारा parliamentary committees in hindi के बारे में दी गई जानकारी आपके लिए बहुत उपयोगी होगी और आप इससे बहुत लाभ उठाएंगे। हम आपके बेहतर भविष्य की कामना करते हैं और आपका हर सपना सच हो।

धन्यवाद।


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